टाइम के बदले ट्रैफिक प्रति सेंसिटिव बनते सिग्नल !

टाइम के बदले ट्रैफिक प्रति सेंसिटिव बनते सिग्नल !

भारत मे ज़्यादातर बड़े बड़े शहरों में वाहनों के ट्रैफिक का संचालन इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों की मदद से किया जाता है । जो एक सटीक समयावधि के मुताबिक लाल या हरि बत्ती से ट्रैफिक को रुकने का या आगे बढ़ो का संकेत देती है । ऐसा हर सिग्नल कम्प्यूटर संचालित होता है । लाल या हरि बत्तियों का ऑन या ऑफ होने का टाइम अलग अलग सिग्नल के लिए अलग अलग होता है । और इसके लिए पहले से ही कम्प्यूटर को डाटा दिया जाता है । उसके बाद कम्प्यूटर अपनी आंतरिक घड़ी के मुताबिक सिग्नलों का संचालन करता है ।

यह पद्धति है तो फूल प्रूफ लेकिन उसमे एक कमी है । यह ये की मान लो कि एक सिग्नल चालीस सेकण्ड तक खुला रहता हो और उस सिग्नल के पास खड़ा पूरा ट्रैफिक मान लो कि वहां का पूरा ट्रैफिक 20 सेकण्ड में पास हो जाता हो तो बाकी की 20 सेकण्ड तक दूसरे तीन सिग्नल पर खड़े ट्रैफिक को खड़ा रहना पड़ता है । वह बिना मतलब के ! पिक अवर्स में चालीस सेकण्ड वाला वही सिग्नल कभी कभी ट्रैफिक के ज्यादा जत्थे को संभाल नहीं पाता । जो आखिर में बड़ी बड़ी लाइन में तब्दील हो जाता है । जो कि समय की बर्बादी है । साथ ही क़ीमती पेट्रोल डीजल की भी ! इससे निजाद पाने के लिए मुम्बई में ट्रैफिक पुलिस सिग्नलिंग की हाईटेक पद्धति को अपनाती है । एरिया ट्रैफिक कंट्रोल ( ATC ) के नाम से जानी जाती इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मुम्बई के कुछ भीड़ भाड़ वाले एरिया में इंस्टॉल की गई है । जो कि परंपरागत पद्धति से बिल्कुल अलग है । जिसमें मुख्य बदलाव यह है कि सामान्य ट्रैफिक सिग्नल टाइमर क्लॉक के मुताबिक लाल या हरी बत्ती जलती हैं , जबकि ATC सिस्टम ट्रैफिक के मुताबिक सिग्नल को ऑन या ऑफ करती है । उसकी रचना बहुत सिम्पल है और कार्य प्रणाली भी !

होता कुछ यूं कि ATC का मुख्य पार्ट मेग्नेटिक फ्लेक्स कहे जाने वाला Z आकार का सेंसर पेड़ है । रास्ते के लेवल पर उसका सिर्फ ऊपरी हिस्सा दिखता है । बाकी का ज़्यादातर हिस्सा जमीं में दबा रहता हैं। यह सेंसर पेड़ टच सेंसटिव है । कोई भी वाहन जैसे उसके ऊपर से गुजरता है की तुरंत इस सेंसर से जुड़े डिटेक्टर में करंट बहता है । जिसे विद्युत सिग्नल को नॉट करने वाला कम्प्यूटर उसे नॉट कर लेता है । लाल सिग्नल को उसी समय वह लाल से हरा कर देता है । जैसे ही वाहन गुजर जाता है उसकी 6 ठ्ठी सेकण्ड पर फिर से सिग्नल हरे से लाल हो जाता है । पांच सेंकड बाद अगर कोई वाहन आ जाता है तब भी वह ऑन ही रहता है ।

इस तरह से ट्रैफिक की तादाद ज़्यादा है तब सेंसर पर से गुजरते वाहनों की लगातार रहती तादाद को परख कर ग्रीन सिग्नल को वह ऑन ही रहने देता है । ट्रैफिक पूरा निकल जाने के बाद ( सेंसर पेड़ पर लगातार 5 सेकण्ड तक कोई वाहन न आये तब ) कम्प्यूटर लाल बत्ती को जला देता है ।ट्रैफिक के ऐसे संचालन से समय की काफ़ी बचत होती है जो दूसरे रूप में पेट्रोल और डीजल को भी बचाती है । खास बात ये की ट्रैफिक जाम होता ही नहीं । ATC सिस्टम फुलप्रूफ भी है । क्योंकि सिग्नल के कम्प्यूटर एक दूसरे जे साथ केबल्स से जुड़े होते है । इतना ही नही लॉजिक के आधार पर वे सिग्नल को ऑन या ऑफ करते है । दुनिया के 300 देशो में ATC सिस्टम से ट्रैफिक का संचालन किया जाता है । हमारा मुम्बई भी उन शहरो के शामिल है ।

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