पेड़ पौधे अपने प्रकांड , पत्ते , डालिया समेत ज्यादातर बायोमास समृद्ध मिट्टी में रहे पोषक तत्व ग्रहण करके बनाती है !

पेड़ पौधे अपने प्रकांड , पत्ते , डालिया समेत ज्यादातर बायोमास समृद्ध मिट्टी में रहे पोषक तत्व ग्रहण करके बनाती है !

पेड़ पौधे अपने प्रकांड , पत्ते , डालिया समेत ज्यादातर बायोमास समृद्ध मिट्टी में रहे पोषक तत्व ग्रहण करके बनाती है !
विशेषकर विज्ञान के पुस्तकों ने जो व्यापक रूप से इस झूठी बात को फैला रखा है उसे झूठ साबित करने के लिए प्रयोग कर उसका खंडन करने वाला वैज्ञानिक बेल्जियम का जान बाप्टिस्टा हेलमोंट था ।

सन 1600 के शुरुआत में उसके प्रयोग के लिए उस समय के इंपीरियल तोल के मुताबिक 200 रतल सुखी मिट्टी को तौल कर एक गमले में भरके उसमें विलो प्रकार के वृक्ष का पौधा बोया । पौधे का वजन 5 रतल था । हेलमोंट ने उसके बाद 5 साल तक उस पौधे को पानी डाल कर बड़ा किया । पांचवे साल उसने उस पौधे को बाहर निकाला । उसका तो उसका वजन 5 रतल से बढ़कर 169 रतल हुआ । मतलब 164 रतल की बढ़ोतरी ! उसके बाल हेलमोंट ने गमले की मिट्टी को सुखा दी और उसका तौल किया तो उसके वजन में सिर्फ 0.13 रतल की कमी आई थी । मतलब छोड़ पौधे के वजन में जो बढ़ोतरी हुई थी उसमें उस मिट्टी का प्रदान सिर्फ 0.08 % प्रतिशत था । बाकी का 99.92 % बढ़ावा दूसरी प्रक्रिया के कारण हुआ था ।

यह प्रक्रिया यानी प्रकाश संश्लेषण इसके द्वारा वनस्पति खुद का ज्यादातर बायोमास तैयार करती है । वनस्पति के पत्ते कार्बन डाइऑक्साइड वाली हवा को उसके पर्णछिद्रो के जरिए ग्रहण करती है । दूसरी ओर मूल द्वारा खींचा हुआ जमीन का पानी h2o पत्ते में जाता है । उस दौरान सूर्य प्रकाशित हो तो पत्ते में रहा क्लोरोफिल सोलर एनर्जी को सोखकर उसकी मदद से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ऐसे दो घटको में बांट देती है । हाइड्रोजन उसके बाद हवा के कार्बन डाइऑक्साइड से मिल जाता है । जिसकी मदद से शर्करा पैदा होती है । वनस्पति कुछ शर्करा अपने बुद्धि के लिए इस्तेमाल करती है और बाकी बची शर्करा को स्टार्च के रूप में स्टोर कर लेती है । दुनिया की सब वनस्पति हर साल लगभग 150 अरब टन शर्करा मुख्य रूप से हवा और पानी की मदद से बनाती है । जमीन की मिट्टी का योगदान उसमें ना के बराबर होता है ।

ना के बराबर मतलब सटीक प्रमाण में कितना ? जानने के लिए अमेरिकन वनस्पतिविदों ने हेलमोंट के प्रयोग को नियंत्रित संजोगो के बीच फिर से दोहराया ।
ग्रीन हाउस के गमले में 1 ग्राम का बीज बोया । बिल्कुल सुखी हुई मिट्टी का वजन 3129 ग्राम था । वनस्पतिविदों ने उसके बाद मिट्टी में पानी डाला और बीज का अंकुरण होने के बाद कई महीनों तक पौधे को बड़ा किया ।

अंत में उस पौधे को मूल समेत बाहर निकालकर सुखाया गया । इलेक्ट्रिक डायर की मदद से मिट्टी की नमी को भी सुखाया गया । वनस्पति में देखा कि पौधे का वजन 82 ग्राम था और मिट्टी का 3120 ग्राम ! 1 ग्राम से विकसित हुए 81 ग्राम का कर लिया जबकि मिट्टी में उसके सामने सिर्फ 9 ग्राम का जत्था पोषक तत्व के रूप में गंवाया था ।

इस प्रयोग ने वन्स फ़ॉर ऑल साबित कर दिया कि वनस्पति को सीधा रखने के लिए जानी जाती मिट्टी उसके बायोमास मतलब वृद्धि में कोई खास रोल नहीं निभाती ।वनस्पति हमेंशा मिट्टी में अल्प मात्रा में मिले हुए बोरान , फॉस्फोरस , पोटेशियम , मेंगेनिज जैसे पोषक तत्व को ही ग्रहण कर मिट्टी को बाकी छोड़ देती है ।

ये सब तत्व मान लो कि वनस्पति के लिये विटामिन है । जिनकी मदद से जैविक प्रक्रिया मुमकिन बनती है । जैसे कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में पोटेशियम तत्व बड़ा महत्व का है। लोह तत्व के बगैर क्लोरोफिल नही बन सकता । मेंगेनिज से वनस्पति नाइट्रोजन को आत्मसात करती है जबकि डाली , प्रकांड के गठन के लिए वनस्पति को कुछ बोरॉन भी मिलना चाहिए ।

सच में महत्वम् ग्राम में या मिलीग्राम में गिने जाते इन सब तत्वों का है । मिट्टी का रोल सिर्फ कितना है कि वनस्पति को बस सीधा रखने में मदद करें । उसके सिवा कोई दूसरी आवश्यकता वनस्पति को मिट्टी की नहीं है । इसी लिए बीसवीं सदी के शुरुआत में माटी रहित खेती का क्रांतिकारी नुस्खा भी अमल में आया – जिसका नाम है हाइड्रोपोनिक्स !

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