बर्म्युडा ट्रायंगल की अब तक की सबसे रहस्यमई और जानलेवा सत्य घटना ! भाग 2

बर्म्युडा ट्रायंगल की अब तक की सबसे रहस्यमई और जानलेवा सत्य घटना ! भाग 2

सबसे पहले आप यह पोस्ट पढ़ने से पहला भाग अवश्य पढ़ें । इस हैरतंगेज सत्य घटना को समझने में आसानी होगी । पहला भाग पढ़े …भाग 01

फोर्ट लोडरडेल के एरपोर्ट एक लेफ्टिनेंट रॉबर्ट कोक्स नाम का पायलट नीची सतह पर उड़ रहा था । अचानक उसके वायरलेस पर एक सन्देशा आया , ‘ मेरे दोनों होकयंत्र बिगड़ गए है । प्लीज मदद कीजिये । मैं फोर्ट लोडरडेल जाने की दिशा ढूंढ रहा हु । लेकिन किस रास्ते पर आगे बढु यह समझ मे नहीं आ रहा । ‘

‘ आप अपना नाम और जगह बताइये । ‘ कोक्स ने तुरंत पूछा ।

‘ मैं एफ टी 28 का पायलट हू । ‘ सामने से मेसेज आया । नीचे जमीन है । लेकिन वह टूटी हुई दिखाई दे रही है । शायद यह किझ के द्वीप हैं । ‘

यह सुनकर रॉबर्ट कोक्स को आश्चर्य हुआ । क्योंकि ये द्वीप तो फ्लोरिडा के दक्षिण भाग में स्थित है । उसने तुरंत जवाब दिया , ‘ एक काम करो । सूर्य आपजे बाई ओर रहे उस तरह से सफर करना शरू रखे । थोड़ी ही देर में मायामी आ जायेगा। उसके बाद आप फोर्ट लोडरडेल पहुंच जाएंगे । ‘

लेकिन कोक्स को कोई जवाब न मिला । थोड़ी बहुत मिनिट बीत गई । आफत में फंसा पायलट कुछ भी बोल नहीं रहा था । मान ले कि वो कुछ बोल रहा था तब भी कोक्स कुछ सुन नहीं पा रहा था । उसे डर लगा कि शायद उसका विमान टूट न पड़ा हो या फिर शायद अब उसे मदद की जरूरत नहीं थी ।

देर तक राह देखने के बाद जवाब आया कि हम द्वीप को पार कर गए है लेकिन अभी तक जमीन दिखाई नहीं दे रही ।

क्यों नहीं दिख रही ? रॉबर्ट कोक्स को आश्चर्य हुआ । अगर विमान उत्तर की आगे बढ़ रहा था तो फ्लोरिडा का किनारे उसे दिखना ही चाहिए । क्योंकि किझ और फ्लोरिडा के बीच ज्यादा दूरी नहीं थीं।ज्यादा से ज्यादा दस बीस किलोमीटर । अब घण्टे के 432 किलोमीटर की स्पीड से उड़ने वाले विमान को इतनी दूरी को पार करने में कितना वक्त लगेगा ? लेकिन अभी तक किनारा उसे दिखा नहीं था । मतपब वह किझ के द्वीप के पास नहीं था । तो फिर कहा था ? शायद पायलट को भी मालूम नहीं था ।

लेफिटनेंट कोक्स ने फिर सवाल पूछे , ‘ आप कितनी ऊंचाई पर उड़ रहे हो ! ‘

लेकिन मेसेज काफ़ी कमजोर आ रहा था । कोक्स ने बताया कि आपके मेसेज काफी कमजोर आ रहे है । आप क्या बोल रहे है । ठीक से सुनाई नहीं दे रहा । ‘

‘ ऊंचाई 4500 फिट है । ‘ यह सन्देशा बेहद साफ़ सुनाई दिया । लेकिन उसके बाद सन्नाटा छा गया । कोक्स ने लोडरडेल के कंट्रोल टावर का संपर्क किया । तब उसे मालूम हुआ कि विमान एक नहि बल्कि पांच विमान गायब हुए है । उसने अब मायामी जाना केंसल कर दिया । उसने अपने प्लेन को लोडरडेल के एरपोर्ट पर उतारा । शायद मदद के लोए कभी भी भागना पड़े तो उसके लिए वह वही पर रुक गया ।

लोडरडेल के हवाई मथक का कंट्रोल टावर में भी वायरलेस शरू थे । फ्लाइट 19 के पायलट आपस में बातचीत कर रहे थे और टावर के ऑपरेटर इस वार्तालाप को थोड़ा बहुत सुन रहे थे । लोडरडेल के नजदीक आई हुई पोर्ट ओवरग्लेज्ड नाम की छावनी में भी एफ टी 28 के संदेशे सुन रहे थे । उनमे से एफ नौका अफसर ने टी 28 के कप्तान चार्ल्स टेइलर को संदेशा भेजा ।

‘ आपके होकायंत्र बिगड़ गए हो तो अच्छे होकायंत्र वाले पायलट को कहो कि आगे रहे और उनके पीछे आप रहे लेकिन सबसे पहले आप हमें यह बताओ कि आप सब अभी है कहाँ ? ‘

‘ कुछ मालूम नही ! ‘ टेइलर ने कहा कि हमने एक द्वीप को पार किया है । समंदर का दिखावा बहुत ही विचित्र है । आप हमें रेडार से ढूंढने के प्रयास करें । हमे आप बताइए कि हम कहा है । ‘

थोड़ी देर आया कि हमारा ईंधन खत्म हो रहा है । उसके बाद भी कई मेसेज आये । जिनका इतना ही अर्थ था कि अब कप्तान चार्ल्स टेइलर ने एडवर्ड पावर्स नाम के पायलट को बनाया गया था ।

अब टेइलर ने ऐसा निर्णय क्यों लिया ? शायद इसलिए कि एडवर्ड पावस के विमान का होकयंत्र ठीक से काम कर रहा था । चलो ये तो स्वाभाविक था । जिसके यंत्र सही है उसे ही आगे रहना चाहिए । लेकिन उन्होंने ये क्यों कहा कि उनका ईंधन खत्म हो रहा है !

क्योकि हर एवेंजर में इंधन भरपूर मात्रा में भरा गया था । उस में इतना ईंधन था कि रात के 8 बजे तक तो आसानी से विमान उड़ सकते थे । अभी तो सिर्फ 4:15 ही बजे थे । नौका अफसर ने दूसरी बात का भी आश्चर्य हुआ कि एवेंजर के संदेश कमजोर हो रहे थे । विमान नगर पश्चिम दिशा में लोडरडेल की ओर आगे बढ़ रहे हो तो उनके संदेश की तीव्रता बढ़नी चाहिए। मेसेज की तीव्रता ऊंची होना चाहिए । आवाज बढ़नी चाहिए । लेकिन यहां तो आवाज धीमी हो रही थी । ऐसा क्यों ? ऐसा होने का मतलब यही हुआ कि वे उल्टी दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे थे ।

विमान के वायरलेस रेडियो ने भी काम कम देना बंद कर दिया था । अब लोडरडेल में भगदड़ हो गई ।पोर्टे ओवर्गलेज्ड ने भी अटलांटिक महासागर में और कैरेबियन समंदर में चलने वाले जहाजों और विमानों को संदेशा भिजवाया कि नौका दल के 5 विमान अगर कहीं भी दिखाई दे तो हमें तुरंत माहिती दीजिए । समंदर पर कोई भंगार भी तैरता हुआ दिखे तो भी हमें बताइए । इस तरह के संदेश से आधे घंटे तक प्रसारित किए गए । लेकिन और एक भी मेसेज आया नहीं ।

तभी दूसरा धमाका हुआ । फ्लाइट 19 का संदेशा वापिस आया । उसने बताया कि थोड़ी देर में हमे समुंदर पर उतरना ही पड़ेगा । लैंडिंग करनी ही पड़ेगी । हमे बचाओ । सिर्फ 10 गेलेन ईंधन बचा है ।

सिर्फ 10 गैलेन ? ये कैसा हो सकता था ।8:00 बजे तक चले उतना ईंधन फ्यूल टैंक में डालने के बाद वह अभी कैसे खत्म हो सकता है । शायद उनके मीटर का डायल पढ़ने में गलती हुई हो या होकायंत्र के माफिक उसका मीटर भी बिगड़ गया होगा ! इस मैसेज के बाद कंट्रोल टावर में फ्लाइट 19 के साथ संपर्क टूट गया। सब कंट्रोल टावर पर सन्नाटा छा गया।

अब किस जगह वे सब है ये उन्हें मालूम नहीं था और उसके बिना तो मदद करना नामुमकिन था । रोशनी कम होने लगी थी । क्योंकि सर्दी के दिन बहुत छोटे थे । नौका अफसरों की चिंता बढ़ने लगी । वे सब कहा है यही मालूम नही था तो इतने बड़े अटलांटिक महासागर में किस प्रकार उनको ढूंढे । जहां पानी की सतह ही रात में न दिखती हो वहां पर उस पर तैरते पायलट और दूसरे सामान को कैसे ढूढे ? चलिए तो भी निकल पडते है , लेकिन कहा ? इसका कोई जवाब नहीं था ।

तभी 7 बजकर 4 मिनट पर दूसरा धमाका हुआ । ‘ धिस इज एफ टी ‘ ऐसे टूटते शब्द आये । मतलब साफ था । अभी तक विमान उड़ रहे थे । रास्ता भटक गए सब रास्ता ढूंढे रहे थे । लेकिन कब तक ???

आखरी सन्देशा के आधार पर मायामी नौकामथक ने गिनती की । उनकी गिनती के मुताबिक मेसेज की दिशा उत्तर पूर्व थी । अटलांटिक महासागर पर ये स्थान 29° उत्तर अक्षांश और 79 ° दक्षिण रेखांश पर है ।

अब सच्चा जायजा तो इस 29 उत्तर अक्षांश और 79 पश्चिम रेखांश पर जाकर ही पता चल सकता है । लेकिन क्या ये बात सही थी ?

अब जाना तो पडेगा ही ! नौका दल के बनाना रिवर एंड सेशन नाम का एयरपोर्ट पर एक बहुत बड़े विमान मार्टिन मरीनर को बचाव कार्य करने के लिए तैयार किया । उसमें कुछ खाने का सामान सब उसमें रखा गया । एयरप्लेन वास्तव में जहाज जैसा था क्योंकि उसकी सतह जहाज की जैसे थी । समुंदर पर लैंडिंग करने में या टेक ऑफ करने के लिए उसे कोई मुश्किल ही नहीं पड़ती थी । शाम बराबर 7:27 पर मार्टिन मरीनर रवाना हुआ । बनाना रिवर ऐर स्टेशन के रनवे पर से आकाश में चढ़ गया।

यू तो समंदर में तैरते पायलट को तो ढूंढना मुश्किल था । लेकिन उस नाव के साथ जुड़े ट्रांसमीटरबीके सिग्नल की मदद से उनको ढूंढना था । लेकिन उसके लिए पहले वे 29°उत्तर अक्षांश और 79° पश्चिम रेखांश की ओर आगे बढ़ रहे थे ।

मार्टिन मनियर के पायलट लेफ्टिनेंट वॉल्टर जेफ्री ने कहा , ‘ अभी तक ट्रांसमीटर का सिग्नल नहीं मिला । कोई आवाज भी सुनाई नहीं दे रहा । चारों ओर अंधेरा है ।

‘ ठीक है । तलाश करते रहो ! ‘ कंट्रोल टावर ने कहा । थोड़ी देर हमारा संपर्क करना ।।

8:30 बजे हम 29 उत्तर अक्षांश और 79° पश्चिम रेखांश पर पहुंच जाएंगे । वहां पर पहुंच कर आपका संपर्क करेंगे । कहकर मार्टिन मरीनर आगे बदज गया।

अब तो अफ़सर को थोड़ी भी शंका हो रही कि 5 एवेंजर अभिमान आखिर में दरिया में समुंदर में टूट पड़ने वाले हैं । क्योंकि विमानों में ईंधन 8:00 बजे तक चले इतना ही भरा गया था । अब 8:00 बजने में से 5 मिनट बाकी रह गई थी । लोडरडेल , बनाना रिवर , पोर्ट ओवर्गलेज्ड सब कंट्रोल टावर के अफसर चिंता में डूब गए। क्योंकि एक साथ पांच एवेंजर विमान रहस्यमई गुम हो जाए ये छोटी बात नहीं थी ।

‘ प्लीज एफ टी 28 ! हमारा सम्पर्क करें । आप कहा पर है। तुरंत जवाब दे । कहां पर हो हमें बताएं हमारे पास समय नहीं तुरंत जवाब दीजिए । ‘ इस तरह के कई संदेश कंट्रोल टावर से प्रसारित किए गए ।समय बीत रहा था । लेकिन कोई जवाब नहीं आया ।

सबके चेहरे अब मायूसी से घिरे थे । अब वाकई में समुंदर में सब विमान टूट पड़े होंगे । लेकिन पायलटों का क्या ?

उनको लगता था कि 29° उत्तर अक्षांश 79° पश्चिम रेखांश पर वे होंगे ऐसा उनको लगता था। लेकिन अब तो मार्टिन मरीनर वहां पहुंचकर कुछ कहे तब बात बने । वह अभी भी अंधेरी रात के आगे बढ़ रहा था । उस जगह पर वह 8:30 बजे पहुंच जाने वाला था । तब तक सबको राह देखनी थी । एक एक मिनट उन्हें एक एक घण्टे जैसी लगी !

8:30 बजे ! लेकिन मार्टिन मरीनर का सन्देशा आया नही । सामने से मैसेज भेजा । लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं आया ।

मर गए ? अब उसके साथ क्या हुआ ? सब नौका सरफेस फिर से चिंता में डूब गए । क्योंकि मरीनर के लिए एक के बाद एक संदेशा भेजा जाता रहा लेकिन कुछ भी नहीं हुआ । उस पर 13 लोग थे।

घंटों पर घंटे बीते । ना संदेश का जवाब आया ना मरीनर खुद अपना कुछ मेसेज मिला । अब क्या करे ! मध्यरात्रि हुई । रात बीत गई। लेकिन न मार्टिन मरीनर आया न उसका मेसेज ।

सूर्योदय हुआ । और फिर क्या ?

नौका दल और हवाई दल के 300 विमान अटलांटिक महासागर की ओर निकल पड़े । कुल 21 जहाज भी निकल पड़े । मानो पूरा महासागर खोद डालना हो । जांच शरू हुई । पूरा दिन निकल गया , शाम हो गए फिर पायलटो का कोई भी समाचार नहीं मिला ।

यह बात बहुत ही रहस्यमय थी , क्योंकि एवेंजर विमानों की रचना बहुत मजबूत थी । पहले तो उसे धीरे रहकर समुंदर में उतर सकता था और उसके बाद भी वह विमान कुछ समय तक तैर सकता था । उतने समय में तो हर पायलट रब्बर की नौका पर चढ़ सकता था । नौका न माइक तब भी लाइफ जैकेट के साथ बाहर भी वह बिना तेरे भी तैरता रह सकता था । चलिए मान लेते है कि कुछ को ऐसा चांस न मिला , लेकिन वहां 5 विमान और 14 लोग थे ।किसी को चांस न मिले ये नामुमकिन था ।

किसी को तो बाहर निकलने का चांस मिलाता ! बाकी नाव तो पानी को छूते ही अपने आप फूल जाए ऐसी व्यवस्था थी । साथ ही उनका प्रवाही इंदन पानी से बिल्कुल हल्का होने के कारण उसका धब्बा भी समुद्र की सतह पर देखने को तुरंत मिल सकता था और उसका बहुत सारा भंगार भी तो था फैलने के लिए । लाइफ जैकेट भी तो था ।

लेकिन अफसोस फिर भी उनको कुछ भी दिखाई नहीं दिया । एवेंजर के सब होकायंत्र एक साथ कैसे बिगड़ सकते थे ? लेफ्टिनेंट टेइलर ने ऐसा क्यों कहा कि समंदर समंदर जैसा नहीं लगता ? टेलर और उसके पायलटों को सूर्य तक क्यों नहीं दिखाई दे रहा था ? रेडियो संदेश भी कंट्रोल नहीं पहुंच पा रहे थे ?इन सब सवालों ने नौका अफसरों को चिंता में डाल दिया !

एक भी सवाल का जवाब उनके पास नहीं था । दोनों जानलेवा अकस्मात बरमूडा ट्राएंगल में हुए थे । इसलिए शंका की सुई आखिर में उस कल्पित ट्रायंगल की ओर मुड़ी और शायद यह सही भी था । भूतकाल में भी कई सारे जहाज और विमानों को खा लिए थे ।

विमान का एक हिस्सा तक नहीं मिला ! सब के सब लापता हो गये । ऐसा पहली बार नहीं हुआ तब। लापता बने हुए एवेंजर विमानों और उसके साथ में उसके बाद भी बरमूडा ट्राएंगल में कई सारे जहाज मानो गायब ही हो गए थे। जिसका एक टुकड़ा तक नही मिल पाया था।

जैसे कि ….

  • संब1947 में अमेरिका का सी 45 नाम का जंगी विमान लापता बना !
  • सन 1948 में ड्यूसोरा नाम का बड़ा विमान 31 पैसेंजर से साथ लापता हुए ।
  • सन 1948 में ही एक डाकोटा विमान बर्म्युडा ट्रायंगल में कही पर डूब गया और उसके साथ 32 मुसाफिर मर गए
  • सन 1949 दूसरा ट्वेंटी मन को खुश हुआ 1950 में ग्लोबमास्टर बरमूडा ट्राएंगल में डूब गया
  • सन 1950 में ही सांड्रा नाम का 350 फीट लंबा अमेरिकन मालवाहक जहाज बरमूडा ट्राएंगल में अदृश्य हो गया । जहाज के कप्तान ने न संदेशा भेजा ना तो जहाज का भंगार कहीं भी देखने को मिला ।
  • सन 1952 में एक ब्रिटिश विमान 35 पैसेंजर के साथ लापता हुआ ।
  • सन 1954 में अमरीकन कॉन्सटेलेशन विमान 42 मुसाफिरों के साथ गायब हो गया ।
  • सन 1956 अमरीका के मार्टिन विमान को भी बर्म्युडा ट्रायंगेल ने निगल लिया । उस के साथ 10 पायलट और सैनिक भी मारे गए ।
  • सन 1965 में मरीन सल्फर क्वीन नाम का मालवाहक जहाज ट सफर करने के लिए रवाना किया गया और वो बस गया । वापस आया ही नहीं । यह जहाज 425 फीट लंबा था ।
  • सन 1967 में अमेरिकी लश्करी मालवाहक जहाज का भी यही हाल हुआ । उसका आभी पता नहीं चला ।
  • सन 1970 में फ्रेंच मालवाहक जहाज मिल्टन आस्ट्राइज भी डूब गया ।
  • सन 1973 में जर्मन मालवाहक जहाज अनीता उसके 32 नाविकों के साथ सतह पर पहुंच गया । यह जहाज 20000 टन का था ।

ऐसे तो कई सारे रहस्यमई प्रसंगों को यहां पर हम लिख सकते हैं । हर प्रसंग बरमुंडा ट्रायंगल का रहस्य को ज्यादा रहस्य में तब्दील हो जाता हैं। प्रश्न तो यही रहता है कि इस भयानक समुंदर में विमान पर जहाज अचानक गायब क्यों हो जाता है ?

एक संभावित खुलासा अमरीकन भूस्तरशास्त्री रिचर्ड डी मैक्लेवर ने दिया था ।

उनका कहना था कि विमान और जहाजों के गायब होने के पीछे हाइड्रेट नाम का वायु कारण भूत होना चाहिए । पानी और दूसरे तत्व के संयोजन से हाइड्रेट पानी जैसा लगता है । पानी जैसा दिखता हाइड्रेट होता बर्फ जैसा है । ठोस भी बर्फ की तरह होता है ।

रिचर्ड का अनुमान है कि समुंदर में 10 फीट नीचे कुछ कारण से पानी और दूसरे संयोजन से अपने आप हाइड्रेट बनता होगा । उस विशाल घुमट के नीचे कुदरती वायु का जथ्था इकठ्ठा होता होगा और क्योंकि समुद्र के तल पर जहां पर भी वायु का जब जोर बढ़ जाता है तो वह सतह तोड़ कर बाहर आ जाता होगा । जिसके कारण वहां बड़ा बुलबुला बन जाता होगा । वह बुलबुला इतना बड़ा होगा कि कुदरती वायु अचानक सपाटी पर सत्ता पर निकल पड़े तो उस क्षेत्र का समंदर की अपनी तारण शक्ति को खो देगा । अब उस क्षेत्र में तैरते जहाज डूबने लगता है जैसे कोई पथ्थर डूब जाए । वह हवा में उड़ते विमान के इंजन को भी तत्काल बंद कर देता है । यह भी हो सकता है इंजन के लिए प्राणवायु अनिवार्य है , क्योंकि इंजन का दहन उसी से हो सकता है । वही रुक जाता है । अब वह भी तुरंत किसी जहाज की तरह डूब जाएगा ।

अब रिचर्ड मैक्लेवर की थियरी कितनी सच्ची है इसकी जांच करने के लिए अपनी जान को जोखिम में डालकर उस रहस्यमय और खतरनाक बर्म्युडा ट्रायंगल में प्रयोग कौन करें यह प्रश्न भी सोचने लायक है ???!!

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