भारत में तुर्क साम्राज्य की स्थापना


भारत में तुर्क साम्राज्य की स्थापना




महमूद गजनवी ने एक महान् साम्राज्य की स्थापना अवश्य की, परन्तु उसका साम्राज्य स्थायी नहीं बन सका । इसका प्रधान कारण यह था कि सुल्तान का साम्राज्य उसकी सैनिक शक्ति पर आश्रित था । उसके साम्राज्य में विमिन तुर्कों के कबीले थे । वे कबीले महमूद के समय मेँ न तो टूटे ही थे औरन गजनी साम्राज्य के प्रति पूर्णत: राजमवत्त ही हुए थे । महमूद के आधीन वे इसलिए बने रहे; क्योंकि सैनिक शक्ति उस समय उनकी दुर्बल थी । वे बिभिन्न (सेलजुक तुर्क, गज तुर्कमान, गोर के सूरी व अफगान) तुर्की कबीले उचित समय के आते ही अपने नेता के नेतृत्व में स्वाधीन होने की आकांक्षा रखते थे । अत: महमूद गजनवी का विशाल साम्राज्य उसकी मृत्यु के दस वर्ष बाद ही छिन्न-मिन्न होने लग गया । महमूद के उत्तराधिकारी भी निर्बल सिद्ध हुए और वे गृह-कलह में फंस गये । इसलिए अवध बिहारी पाण्डेय लिखते हैं कि यदि उसके उत्तराधिकारी अपने पिता के समान शक्तिशाली भी होते तो भी महमूद के साम्राज्य का विघटन एक अपरिहार्य था । उसके निर्बल उत्तराधिकारियों की कमजोरी का लाभ सर्वप्रथम सेलजुक तुर्कों ने उठाया । उन्होंने खुरासान को विजित का अपना एक स्वतन्त्र राज्य स्थापित कर लिया । इसके उपरान्त गोर और ख्वारिज्म के नवीन साम्राज्य पनपे और उनके उत्कर्ष से सेलजुक साम्राज्य समाप्त हो गया । महमूद के उत्तराधिकारियों पर जब भी मध्य एशिया से आक्रमण होते तो वे भाग का पंजाब में शरण लेने आ जाते थे । हस प्रकार महमूद की मृत्यु के 125 वर्ष उपरान्त तो महमूद के उत्तराधिकारी लाहौर को अपनी राजधानी बनाकर स्थायी रूप से पंजाब में ही रहने लग गये थे ।




गोर राज्य की स्थापना




इन परिस्थितियों में गोर राज्य शक्तिशाली बन गया । यह अफ़गानिस्तान की पहाडियों के मध्य हिरात के दक्षिणपूर्व में स्थित था और गजनी के ही आधीन था । गज़नी की सत्ता निर्बल हो जाने पर गोर ने स्वतन्त्र राज्य होने का प्रयास किया । गोर में जो वंश-प्रधान था, उसका नाम ‘शसबानी’ था । इस वंश का प्रधान सैफुद्दीन था । उसने कुछ समय के लिए नजमी पर अधिकार कर लिया था । परन्तु गजनी के सुल्तान “बहराम शाह’ ने निर्दयता से कुतुबुद्दीन और उसके भाता सैफुद्दीन को कुचल दिया । इसका बदला लेने की नियत से अलाउद्दीन हुसैन ने गजनी पर आक्रमण किया और उसे अग्निदेव के भेंट कर दिया । यह नगर सात दिन तक जलता रहा और इस अग्नि में गज़नी का सारा गौरव एवं सौन्दर्यं नष्ट हो गया और अलाउद्दीन विश्व को जलाने वाला की पदवी से अलंकृत हुआ । इस समय गजनी का सुल्तान खुशव शाह था । उसे गजनी से निकाल दिया गया । वह 1160 ईं. तक लाहौर से गजनी पर राज्य करता रहा । उसका उत्तराधिकारी खुसरव मलिक था । इसके समय गोर राज्य की सरकार में भी परिवर्तन हुआ । यह दस वर्ष के लिए झा-तुर्कपग्न के आधीन रहा । इसके उपरान्त अलाउद्दीन के उत्तराधिकारी सैफुउद्दीन मुहम्मद ने तुर्कों को भगाने का प्रयास किया; परन्तु युद्ध में वह स्वयं काम आ गया । लेकिन उसके चचेरे माई गियासुद्दीन मुहम्मद ने 1173 ईं. में गजनी से तुर्कों को भगाने में सफ़लता प्राप्त की और अपने छोटे भाई शहाबुद्दीन को गजनी का गवर्नर बना दिया और स्वयं गोर का ही शासक बना रहा दोनों भाइयों में सम्बन्थ अच्छे रहे । यह शहाबुद्दीन ही आगे मुईंजुद्दीन के नाम से विख्यात हुआ । इसने गज़नी पर मुहम्मद गोरी के नाम से राज्य किया और तुर्क साम्राज्य की स्थापना के उद्देश्य से उसने भी महमूद की भाँति भारत पर अनेक आक्रमण किये ।शहाबुद्दीन 1173 ई. मेँ गजनी का स्वामी बना और वह 30 वर्ष तक गज़नी पर शासन करता रहा । पंजाब पर अब भी महमूद के वंशज राज्य का रहे थे । शहाबुद्दीन ( मूईंजुद्दीन) सोचता था कि पंजाब से गजनी पर कभी भी हमला हो सकता है । अत: उसे अपने गज़नी राज्य की सुरक्षा की चिन्ता थी । इसके अलावा महत्वाकांक्षी होने के कारण वह अपना साम्राज्य भी विस्तृत करना चाहता था और गोर वंश का मान भी बढाना चाहता था । अब प्रश्न यह प्रस्तुत होता है कि ये गोर थे कौन ? इस प्रश्न का समाधान विभिन्न इतिहासकारों ने अपनी विभिन्न प्रकार की धारणाओं द्वारा करने का प्रयास किया है । गोर के शासक अपने नाम के अन्त में ‘सूरी’ शब्द लगाते थे । इस शब्द के आधार पर कुछ इतिहासकारों ने उन्हें अफगानी माना है । इस दिशा में इतिहासकार डार्न व एलकिंसटन के नाम उल्लेखनीय हैं । जेबी. मेलीसन उन्हें उस जाति का वंशज मानता है,जिसने 1010 ईं. में भारत पर आक्रमण से लौटते हुए महमूद गजनवी की सेना को लूटा था । परन्तु सर वुज्जल हेग की मान्यता है कि वे बस्ख के समानियों की भाँति पूर्वी पारसी थे । डॉ. अवध बिहारी के पाण्डेय भी ईसी मत का समर्थन करते हैं । ये ताजिक परिवार के ये जिनके पूर्वज फारस से आकर यहाँ वस गये थे और गोर पर शासन करने लगे थे । इस वंश का संस्थापक शंसा था । हन्होंने गोर से गुज नुर्कमानो को मगा का अपनी सत्ता स्थापित की थी ।

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