मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक अवस्था


मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक अवस्था




जिस समय मुहम्मद गोरी ने भारत पर महमूद गजनबी की भाँति निरन्तर आक्रमण काना आरम्भ किया था, उस समय भारत की राजनीतिक अवस्था सन्तोषप्रद नहीँ थी । उस समय समस्त उत्तरी भारत छोटे-छोटे स्वतन्त्र राज्यों में विभक्त था । अधिकांश राज्य राजपूत नरेशों से शासित होते थे । अजमेर मेँ चौहान’वंश का राजा पृथ्वीराज, कन्यौज में राठौर वंश का जयचन्द, बंगाल में पालवंश का महीपाल राजा था । इन तीनों नरेशों के सम्बन्थ आपस में अच्छे नहीं थे । कश्मीर इस समय रानी दिद्दा से शासित हो रहा था । हालांकि वह एक योग्य स्त्री थी…परन्तु वह राज्य के आन्तरिक्र उपद्रवों से परेशान थी । मुल्तान व पंजाब पर मुसलमानों का शासन गजनबी के समय से ही स्थापित हो गया था । उनकी सहानुभूति तो मुहम्मद गोरी से होनी ही चाहिये थी । दक्षिण भारत में परवर्ती चालुक्य व चोल वंशों के राज्य ये । वे भी परस्पर संघर्षरत थे ।




उत्तरी भारत के शक्तिशाली राजपूत राज्य भी अब निर्बलता क्रो प्राप्त हो रहे थे । गुर्जरढप्रतिहारों का प्रभुत्व विनष्ट हो चुका था । चौहान वंश दिल्ली व अजमेर पर शासन कर रहा था । यह राजपूत वंश उन राजपूत कुलों में से एक था, जिन्होंने अग्नि के समक्ष भारत में तुकों क्रो न घुसने देने की प्रतिज्ञा की थी । इस वंश के अजयराम ने बारहवीं शती के प्रथम चरण में अजयमेर (अजमेर) नगर बसाया था । 1153 ई. में विग्रहराज वीसलदेव इस वंश का प्रतापी राजा हुआ । उसने 1164 ई. तक राज्य किया । अपने शासनकाल मेँ उसने गहड़वालों से दिल्ली जीत लिया था । पृथ्वीराज चौहान तृतीय इसी वंश का प्रतापी शासक था, जो वीसलदेव के उत्तराधिकारी सोमेश्वर की मृत्यु पर 1177 ईं. में अजमेर की गद्दी पर बैठा था । वह अपनी वीरता एवं अदम्य उत्साह के लिए समस्त उत्तरी भारत में विख्यात था । वास्तव में वह अपने समय का सर्वोच्च वीर पुंगव था । राज्य-सिहासन पर बैठते ही उसने अपने साम्राज्य का विस्तार प्रारम्भ कर दिया । इस कारण उसे कन्यौज के शासक जयचन्द से संघर्ष करना पड़ा । जयचन्द की पुत्री संयोगिता का स्वयंवर से जब पृथ्वीराज बलपूर्वक हरण करके ले आया तो उनमें शत्रुता और’ भी प्रबल हो गई । इसीलिए कहा जाता है कि जयचन्द ने मुहम्मद गोरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमत्रित किया था । पृथ्वीराज ने चन्देलवंशीय परमर्दिन से भी युद्ध किया । साम्राज्य विस्तार के कारण ही उसे चालुक्य वंश के भीम द्वितीय से भी युद्ध करना पडा था । वह अपनी विजय यात्राओं के कारण ही अन्य राजपूत नेरशों की आँखों का काँटा बन गया था । कहने का तात्पर्य यह है कि उत्तर भारत में उस समय चार प्रमुख राज्य थे । दिल्ली में तोमर वंश, अजमेर मेँ चौहान वंश का, कनौज़ में राठौर वंश का और पूर्व मेँ बिहार-बंगाल में पाल व सेन वंश का राज्य था । परन्तु ये चारों शक्तियाँ उस समय आपस में झगड़ती रहती थीं । अत: उनमें राजनीतिक एकता का सर्वथा अभाव था ।




अत: स्पष्ट है कि उस समय भारत की राजनीतिक अवस्था मुहम्मद गोरी के अनुकूल थी । भारत के राजपूत नरेश व्यर्थ की मगन-मर्यादा की रक्षा हेतु परस्पर लड़ने में अपना गौरव समझते थे । उन्होंने कभी भी देश की सुरक्षा हेतु संयुक्त रक्षापंक्ति बनाने का विचार नहीं किया । इसलिए मुस्लिम आक्रमणकारी सुगमता से खैबर व बोलन के दरों क्रो पार का भारत पर सदियों तक सुगमता से आक्रमण काते रहे ।




राजपूत राज्यों में उस समय सामन्त व्यवस्था भी थी । प्रत्येक राज्य जागीरों मेँ विभक्त था । जागीरदार अपने प्रदेशों का भूमि कर स्वयं लेते थे । दसवीं सदी तक वे अपने स्वामी नरेशों के स्वामी-भक्त बने रहे । परन्तु हन तुर्कों के आक्रमणों के समय वे पूर्ण स्वतन्व होने का प्रयास कर रहे थे । प्रो. हबीब तथा निजामी ने इस सन्दर्भ में लिखा है”जब तुर्क भारतीय रंगमंच पर उपस्थित हुए तो सामन्तशाही अपने अन्तिम और अपने इतिहास के सबसे चिन्ताजनक्त चरणों में पदार्पण कर चुकी थी . ।”सामाजिक अवस्था : हिन्दुओँ में समन्वयकारी भावना का अन्त हो चुका था । निरन्तर चारों वर्णो के अतिरिक्त जातियाँ व उपजातियाँ बनती जा रही थीं । इससे हिन्दू समाज की एकता विनिष्ट हो रही थी । स्तियों का समाज में आदर नहीं था । सती-प्रथा का प्रचलन था । शूद्र लोग अब मी समाज के तिरस्कृत अंग बने हुए थे । वैश्यों के प्रति भी विशेष सम्मान नहीं था । केवल ब्राह्मण व क्षत्रिय ही समाज में सम्मान की दृष्टि से देखे जाते थे । न्याय के क्षेत्र में मी बाह्मणों का पक्षपात किया जाता था । उन्हें कठोर दण्ड नहीं दिया जाता था । अलबैरूनी ने लिखा हैं कि सामाजिक कुरीतियाँ अन्दर से समाज को खोखला बना रही थीं । शिक्षण-संस्थाओं में भ्रष्टाचार फेल रहा था । मद्यपान जोरों से बढ रहा था । बिक्रमसिग्ला क्तिम्लय के एक छात्र के पास जब्र शराब की बोतल मिली तो उससे पूछा क्या कि यह शराब कहॉ से आई । प्रत्युत्तर में छात्र ने बताया किं यह उसे एक भिक्षुणी ने दी है । अत: स्पष्ट है कि समाज में अनैतिकता का कीड़ा भी लग गया था ।

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