कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ईं.)

कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ईं.) 1 ‘क्या राज्यारोहण मुहम्मद गोरी अपनी आकस्मिक मृत्यु (15 मार्च, 1206 ई3 के कारण अपना कोई उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं कर सका था । उसके क्रोईं पुत्र भी नहीं था । ऐसी अवस्था में वह अपने गुलामों पर ही विश्वास काता था । मिनहाज-सिराज के अनुसार, उसने एक वार स्पष्ट भी कर … Read moreकुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ईं.)

दिल्ली सल्सनत्त की स्थापना

दिल्ली सल्सनत्त की स्थापना इतिहास इस तथ्य को स्पष्ट उजागर करता है कि विश्व में साम्राज्य बनते और विनिष्ट होते रहे हैं और उनके निर्माण व विनाश में युद्ध निर्णायक भूमिका निभाते हैं । यही बात तराइन के दूसरे युद्ध (1192 ई) के लिए कही जा सकती है । जैसाकि इससे पूर्व स्पष्ट कर आये … Read moreदिल्ली सल्सनत्त की स्थापना

आक्रमणों के प्रभाव

आक्रमणों के प्रभाव मुहम्मद गोरी के भारतीय आक्रमण तूफान की भाँति सिद्ध हुए । उसने भारत में जमकर हमले किये और वह जब भारत से लोटता या तो अपने विजित प्रदेश के प्रबन्ध की व्यवस्था अपने आदमियों के अधीन करके जाता था । इसलिए यह स्वाभाविक था कि उसके आक्रमण के प्रभाव भी भारत पर … Read moreआक्रमणों के प्रभाव

राजपूतो के पराजय के सामान्य कारण

ईन कारणों के अलावा हम और भी कारण निर्धारित कर सकते हैं । उनको हम सामान्य कारणों की श्रेणी में ले सकते हैं । वे कारण निम्नलिखित हैं… ( I ) सामाजिक : भारत को बिमिन्न जातियों व धर्मों का अजायबघर माना जाता है । भारत में जातियाँ स्तनों अधिक संरक्या में हैं कि वे … Read moreराजपूतो के पराजय के सामान्य कारण

राजपूत राज्यो की हार के कारण

आधुनिक युग के विख्यात इतिहासकार सर जदूनाथ सरकारने भी अपने महान् शोधकार्य के उपरान्त राजपूत नरेशों की पराजय के निम्नलिखित कारण बताये हैँ… (1) आपस की फूट जदुमाथ सरकार क्री मान्यता है कि देश का सबसे महान् शत्रु घर का भेदी तथा देशवासियों की आपसी फूट होती है । सातवीं शती से पूर्व अफ़गानिस्तान तथा … Read moreराजपूत राज्यो की हार के कारण

राजपूतों की पराजय

राजपूतों की पराजय मुसलमानों की भारत बिजय तथा उनको इस कार्य में मिली असाधारण सफलता कोई साधारण ऐतिहासिक घटना नहीं थी । पृथ्वीराज चौहान भारत का अन्तिम हिन्दू सम्राट था जो अपनी शूरता व वीरता के लिए उत्तरी भारत में प्रख्यात था । अत: उसकी पराजय भारत के इतिहास में कोई साधारण पराजय नहीं थी … Read moreराजपूतों की पराजय

शाहबुद्दीन ने किए हुए आक्रमण

राजस्थान में चौथा विद्रोह राजपूतों को मुस्लिम दासता बुरी तरह से अखर रही थी । उनकी दासता एक क्रंड़वे लूँट निगलने के समान लग रही थी । वे दासता के जूड़े को उतार फेंकना चाहते थे । इस बार मेद और चौहानों ने विद्रोह का श्री गणेश किया । उन्होंने अन्हिलवाड़ा के चालुक्य नरेश को … Read moreशाहबुद्दीन ने किए हुए आक्रमण

शहाबुद्दीन गोरी के आक्रमण

अजमेर में दूसरा विद्रोह राजपूत नरेशों को गोरी की अजमेर व्यवस्था असह्य थी । इसमें उनका घोर अपमान था । अत: पृथ्वीराज के भ्राता हरिराज ने मुहम्मद गोरी के गजनी लौटते ही रणथम्भोर का दुर्ग घेर लिया । यहाँ गोरी अपने अधिकारी किबाम उल मुल्क के नेतृत्व में मुस्लिम सेना छोड़ गया था । इसके … Read moreशहाबुद्दीन गोरी के आक्रमण

शाहबुहीन गोरी के भारत पर आक्रमण

शाहबुहीन गोरी के भारत पर आक्रमण मुहम्मद गोरी की मुल्तान विजय शाहबुदीन गोरी ने प्रथम आक्रमण मुल्तान पर किया । इसका कारण यह था कि मुल्तान करमाथी (शिया) मुसलमानों के अधिकार में था । मुम्मी मुसलमान उन्हें इस्लाम द्रोही मानते हैं । दूसरा कारण यह था कि इसको विजित करने के उपरान्त गजनी और भारत … Read moreशाहबुहीन गोरी के भारत पर आक्रमण

मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक अवस्था

मुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक अवस्था जिस समय मुहम्मद गोरी ने भारत पर महमूद गजनबी की भाँति निरन्तर आक्रमण काना आरम्भ किया था, उस समय भारत की राजनीतिक अवस्था सन्तोषप्रद नहीँ थी । उस समय समस्त उत्तरी भारत छोटे-छोटे स्वतन्त्र राज्यों में विभक्त था । अधिकांश राज्य राजपूत नरेशों से शासित … Read moreमुहम्मद गोरी के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक अवस्था

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